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बड़वाह में मौत का जाम: ट्रैफिक व्यवस्था ध्वस्त, जय स्तंभ और मेन चौराहे पर हर दिन मंडरा रहा हादसों का खतरा!

ग्राउंड रिपोर्ट: मुख्य बिंदु

  • हॉटस्पॉट: जय स्तंभ और मेन चौराहा बने ‘डेंजर ज़ोन’।
  • समस्या: ट्रैफिक पुलिस की गैरमौजूदगी और बेतरतीब वाहन पार्किंग।
  • खतरा: स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों की जान जोखिम में।
  • मांग: चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस की स्थायी तैनाती की दरकार।

बड़वाह (अर्पित कीवे)। नगर की सड़कों पर इन दिनों हालात बेहद भयावह हो चुके हैं। यहां लगने वाला जाम अब सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि “मौत का जाम” बन गया है। शहर के सबसे व्यस्त जय स्तंभ चौराहा और मेन चौराहे पर ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त नजर आ रही है, जहां हर दिन सैकड़ों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर गुजरने को मजबूर हैं।

पीक आवर्स में डरावने हालात: नियमों की उड़ रही धज्जियां

सुबह और शाम के पीक टाइम में इन चौराहों की स्थिति और भी डरावनी हो जाती है। चारों ओर वाहनों की लंबी कतारें, बेतरतीब खड़े वाहन, और बिना किसी नियम के दौड़ते ऑटो और टेम्पो यह सब मिलकर एक खतरनाक माहौल तैयार कर रहे हैं। यहां न तो ट्रैफिक को नियंत्रित करने वाला कोई दिखाई देता है और न ही नियमों का पालन करवाने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी।

हादसों का केंद्र बने चौराहे

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इन चौराहों पर लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। कई बार छोटे-छोटे हादसे बड़े हादसों में बदल चुके हैं और कुछ मामलों में लोगों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस और स्थायी कदम नहीं उठाया गया है, जो नगरवासियों के लिए चिंता और आक्रोश का बड़ा कारण बन गया है।

राहगीरों के लिए बड़ी चुनौती, अभिभावक चिंतित

स्थानीय व्यापारियों और रहवासियों का कहना है कि ट्रैफिक पुलिस की अनुपस्थिति ने इस समस्या को और विकराल बना दिया है। वाहन चालक मनमानी तरीके से वाहन चला रहे हैं। कोई भी लेन का पालन नहीं करता, गलत दिशा में वाहन चलाना आम बात हो गई है, और हॉर्न के शोर के बीच हर पल दुर्घटना का खतरा मंडराता रहता है।

इतना ही नहीं, स्कूल जाने वाले बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए इन चौराहों को पार करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं रह गया है। कई अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, वहीं राहगीरों को हर बार सड़क पार करते समय डर का सामना करना पड़ता है।

प्रशासन से सख्त मांग और जनता का आक्रोश

नगरवासियों ने प्रशासन से सख्त मांग की है कि इन प्रमुख चौराहों पर तत्काल ट्रैफिक पुलिस की स्थायी तैनाती की जाए। साथ ही ट्रैफिक सिग्नल और सख्त नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि इस बढ़ते खतरे को रोका जा सके।

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यदि समय रहते इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले दिनों में यह “मौत का जाम” और भी खतरनाक रूप ले सकता है। अब सवाल यह है कि प्रशासन कब जागेगा या फिर किसी और बड़ी दुर्घटना के बाद ही कार्रवाई होगी।


टिप्पणी: इस समस्या को लेकर जब स्थानीय जिम्मेदारों का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, तो फिलहाल संपर्क नहीं हो सका। प्रशासन का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

अंकित कीवे
अंकित कीवेhttps://theviratkesari.com/
अंकित कीवे एक अनुभवी पत्रकार, ब्लॉगर और 'द विराट केसरी' के मुख्य संपादक हैं। उन्होंने वर्ष 2015 में सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की, लेकिन समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी और बेबाक लेखन के शौक ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में ला खड़ा किया। साल 2020 से वे लगातार डिजिटल मीडिया, ब्लॉगिंग और प्रिंट मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने अनुभव और दूरदृष्टि के साथ, वे पिछले एक साल से 'द विराट केसरी' समाचार पत्र का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। एक संपादक के तौर पर अंकित का दृढ़ विश्वास है कि सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता ही लोकतंत्र का आधार है। अपने न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से वे विशेष रूप से मध्य प्रदेश, स्थानीय प्रशासन, क्राइम और आम जनता से जुड़े उन मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं, जिनका सीधा असर समाज पर पड़ता है।
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