मुख्य बिंदु:
- अवैध बिक्री: बड़वाह, सनावद और ओंकारेश्वर क्षेत्र में बिना RERA पंजीयन के कट रही हैं कॉलोनियां।
- लोन में अड़चन: जरूरी स्वीकृतियां न होने से प्लॉट खरीदारों को बैंक से होम लोन मिलने में आ रही भारी परेशानी।
- कानूनी प्रावधान: रेरा एक्ट की धारा 3 और 59 के तहत बिना रजिस्ट्रेशन विज्ञापन और बिक्री गैर-कानूनी, 3 साल की सजा का है प्रावधान।
- प्रशासन पर सवाल: शिकायतों के बावजूद स्थानीय प्रशासन और जिम्मेदार विभागों की चुप्पी से भूमाफियाओं के हौसले बुलंद।
अंकित कीवे (संपादक, द विराट केसरी)। निमाड़ अंचल के प्रमुख शहरों- बड़वाह, सनावद और तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में इन दिनों रियल एस्टेट के नाम पर एक बड़ा खेल धड़ल्ले से चल रहा है। भूमाफिया और कॉलोनाइजर बिना RERA (Real Estate Regulatory Authority) पंजीयन और आवश्यक सरकारी स्वीकृतियों के ही कॉलोनियां काटकर प्लॉट बेच रहे हैं।
इस अवैध कारोबार के जाल में फंसकर आम लोग अपनी जिंदगी भर की गाढ़ी कमाई दांव पर लगा रहे हैं, जबकि स्थानीय प्रशासन और जिम्मेदार विभाग सब कुछ जानकर भी मूकदर्शक बने हुए हैं।
’RERA Applied’ का नया हथकंडा: आंखों में झोंक रहे धूल
इन क्षेत्रों में कॉलोनाइजरों ने ग्राहकों को फंसाने का एक नया तरीका निकाल लिया है। कई कॉलोनाइजर सिर्फ RERA में पंजीयन के लिए आवेदन (Apply) कर देते हैं और ग्राहकों को ‘RERA Applied’ या ‘रेरा में प्रक्रियाधीन’ बताकर प्लॉट की धड़ल्ले से बुकिंग, मार्केटिंग और बिक्री शुरू कर देते हैं। जबकि रेरा के नियमों के अनुसार यह पूरी तरह से गैर-कानूनी है।
जब तक किसी भी प्रोजेक्ट को आधिकारिक तौर पर रेरा का रजिस्ट्रेशन नंबर (RERA Registration Number) नहीं मिल जाता, तब तक प्रमोटर किसी भी रूप में उसका विज्ञापन या बिक्री नहीं कर सकता। आवेदन मात्र कर देने से कॉलोनाइजर को प्लॉट बेचने का कानूनी अधिकार नहीं मिल जाता।
कानून क्या कहता है? (RERA Act, Section 3)
रेरा अधिनियम की धारा 3(1) बिल्कुल स्पष्ट कहती है कि:
“कोई भी प्रमोटर/बिल्डर किसी भी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट का विज्ञापन, मार्केटिंग, बुकिंग या बिक्री तब तक नहीं कर सकता, जब तक कि वह उस प्रोजेक्ट को रेरा अथॉरिटी में पंजीकृत (Register) न करा ले।”
‘RERA Applied’ का मतलब रजिस्ट्रेशन नहीं होता। जब तक अथॉरिटी सारे कागजात चेक करके एक RERA Registration Number (जो आमतौर पर P- से शुरू होता है) जारी नहीं कर देती, तब तक एक भी प्लॉट बेचना या उसका विज्ञापन छापना पूरी तरह से गैर-कानूनी है।
बिना पंजीयन कैसे हो रहा प्रचार? प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब किसी भी आवासीय या व्यावसायिक कॉलोनी के प्रोजेक्ट का RERA के तहत पंजीकृत होना अनिवार्य है, तो इन क्षेत्रों में बिना पंजीयन के प्लॉटों की खुलेआम बिक्री, मार्केटिंग और प्रचार-प्रसार कैसे हो रहा है? अवैध कॉलोनियों में प्लॉट खरीदने वाले कई लोगों की परेशानी अब बढ़ने लगी है।
जरूरी दस्तावेज और रेरा अप्रूवल न होने के कारण इन खरीदारों को बैंकों से लोन लेने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद स्थानीय प्रशासन और नगर तथा ग्राम निवेश (T&CP) विभाग की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह से सवालों के घेरे में है।
क्या कहते हैं RERA के कड़े नियम?
रेरा (RERA) अधिनियम आम खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया है, जिसमें उल्लंघन करने वालों के खिलाफ बेहद सख्त कार्रवाई के प्रावधान हैं:
- धारा 3 का उल्लंघन: RERA Act की धारा 3 के तहत, किसी भी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट को पंजीकृत किए बिना उसका विज्ञापन करना, मार्केटिंग करना, बुकिंग लेना या प्लॉट की बिक्री करना पूरी तरह से अवैध है।
- धारा 59 के तहत जुर्माना और सजा: अगर कोई प्रमोटर बिना रजिस्ट्रेशन के प्रोजेक्ट बेचता है, तो धारा 59 के तहत उस पर परियोजना की अनुमानित लागत का 10% तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
- जेल का प्रावधान: आदेश के बाद भी यदि कॉलोनाइजर उल्लंघन जारी रखता है, तो उसे तीन वर्ष तक की जेल, अतिरिक्त 10% जुर्माना अथवा दोनों सजा एक साथ हो सकती है।
द विराट केसरी की अपील: प्लॉट खरीदने से पहले रहें सतर्क
आम जनता को अपनी मेहनत की कमाई सुरक्षित रखने के लिए जागरूक होना पड़ेगा। केवल कॉलोनाइजर या ब्रोकर के लुभावने वादों और बातों पर भरोसा न करें। प्लॉट बुक करने से पहले इन 5 बातों का विशेष ध्यान रखें:
- प्रोजेक्ट का RERA पंजीयन (Registration) ऑनलाइन जरूर जांचें। पक्का नंबर मिलने के बाद ही निवेश करें (केवल ‘रेरा में फाइल लगी है’ जैसी बातों पर भरोसा न करें)।
- कॉलोनी की टीएंडसीपी (T&CP) और स्थानीय निकाय से मिली स्वीकृतियां देखें।
- जमीन के असली मालिक और भूमि संबंधी दस्तावेजों (Registry/Khasra) की कानूनी जांच कराएं।
- कॉलोनी में विकास अनुमति और पास हुए लेआउट (Layout) की स्थिति स्पष्ट करें।
- कोई भी पैसा देने से पहले बैंक से अपने लोन की पात्रता और उस प्रोजेक्ट पर लोन होने की जानकारी स्पष्ट कर लें।
अब देखना यह है कि क्या इस खुलासे और बढ़ती शिकायतों के बाद जिला प्रशासन और संबंधित विभाग नींद से जागकर इन अवैध कॉलोनाइजरों पर नियमानुसार कोई सख्त कार्रवाई करेंगे, या आम लोगों की गाढ़ी कमाई इसी तरह लुटती रहेगी।





