प्रमुख बातें:
- दु:खद हादसा: गोमुख घाट पर नर्मदा नदी में नहाते समय गहरे पानी में जाने से हुई युवक की मौत।
- उज्जैन से आया था मृतक: रात 3 बजे बाइक से दर्शन के लिए निकले थे दोनों दोस्त, ओंकारेश्वर पहुंचते ही हुआ हादसा।
- मौतों का डरावना आंकड़ा: इस वर्ष अब तक ओंकारेश्वर के अलग-अलग घाटों पर 25 श्रद्धालु गंवा चुके हैं अपनी जान।
- प्रशासन पर उठे सवाल: 18 अगस्त को लखनऊ के श्रद्धालु की मौत के बाद भी घाटों पर नहीं किए गए पुख्ता सुरक्षा इंतजाम।
अंकित कीवे (ओंकारेश्वर, द विराट केसरी)। मध्य प्रदेश की पवित्र तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी के घाट अब श्रद्धालुओं के लिए ‘मौत के घाट’ बनते जा रहे हैं। यहां डूबने से होने वाली मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
बुधवार को एक बार फिर गोमुख घाट पर नर्मदा स्नान करने गए उज्जैन के एक 18 वर्षीय युवक की गहरे पानी में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्थाओं और घाटों पर मॉनिटरिंग की पोल खोलने के लिए काफी है, क्योंकि इस साल घाटों पर डूबने से यह 25वीं मौत है।
रात 3 बजे उज्जैन से बाइक से निकले थे दोनों दोस्त
मिली जानकारी के अनुसार, उज्जैन जिले के कवासा गांव का रहने वाला 18 वर्षीय आकाश (पिता अशोक रायकवार) 26 अगस्त की सुबह करीब 8:30 बजे ओंकारेश्वर पहुंचा था।
बताया जा रहा है कि आकाश अपने एक दोस्त के साथ दर्शन करने के लिए रात करीब 3 बजे उज्जैन से मोटरसाइकिल पर रवाना हुआ था। ओंकारेश्वर पहुंचने के बाद दोनों दोस्त सबसे पहले पवित्र स्नान के लिए गोमुख घाट पर पहुंचे थे।
गहरे पानी में समाया आकाश, गोताखोरों ने निकाला शव
गोमुख घाट पर स्नान करते समय आकाश अचानक गहरे पानी की तरफ चला गया और तेज बहाव के बीच डूबने लगा। जब तक उसका दोस्त और वहां मौजूद अन्य लोग कुछ समझ पाते, वह आंखों के सामने पानी में ओझल हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही नगर परिषद के गोताखोर तुकाराम केवट और एसडीआरएफ (SDRF) की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। काफी मशक्कत और तलाश के बाद आकाश के शव को नर्मदा नदी से बाहर निकाला गया, जिसे देखकर उसके दोस्त का रो-रोकर बुरा हाल था।
मांधाता पुलिस ने दर्ज किया मामला, परिजनों को सौंपा शव
घटना की जानकारी मिलते ही मांधाता थाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी। पुलिस ने पंचनामा बनाकर शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशासन ने शव को उसके दोस्त और रोते-बिलखते परिजनों को सौंप दिया, जिसके बाद वे उसे लेकर उज्जैन रवाना हो गए।
सिर्फ अपीलों तक सीमित है प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था?
ओंकारेश्वर में लगातार हो रहे ये हादसे प्रशासनिक दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। अभी कुछ ही दिन पहले, 18 अगस्त को उत्तर प्रदेश के लखनऊ से आए एक श्रद्धालु की भी डूबने से मौत हो गई थी।
प्रशासन केवल घाटों पर ‘गहरे पानी में न जाने’ की अपील और बोर्ड लगाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेता है। इस वर्ष 25 लोगों की मौत यह साबित करती है कि घाटों पर श्रद्धालुओं को सुरक्षित क्षेत्र में रोकने और उन्हें जागरूक करने के लिए कोई ठोस जमीनी इंतजाम नहीं हैं।





