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DWGS विवाद में प्रशासन बनाम ज़मीनी हकीकत: बड़वाह में शराब फैक्ट्री के अपशिष्ट पर सवाल! जांच के बाद भी संदेह बरकरार!

प्रमुख बिंदु

  • आरोप: पशु आहार के नाम पर हानिकारक DWGS अपशिष्ट की अवैध बिक्री।
  • प्रशासनिक रुख: SDM की जांच में अवैध निष्कासन की पुष्टि नहीं, पर संदेह बरकरार।
  • बड़ा खुलासा: शिकायतकर्ता का दावा-अधिकारियों को दिखाया गया गलत प्लांट।
  • विरोधाभास: प्रदूषण बोर्ड और स्थानीय प्रशासन के दावों में तालमेल की कमी।
  • चेतावनी: SDM बोले-परिवहन करते पाए जाने पर होगी गाड़ियों पर कार्रवाई।

द विराट केसरी इंदौर। ग्राम खोड़ी स्थित Associated Alcohol and Breweries Limited से निकलने वाले डीडब्ल्यूजीएस (DWGS) अपशिष्ट को लेकर उठा विवाद अब और गहराता जा रहा है। पशु आहार के नाम पर इस अपशिष्ट की बिक्री और उसके संभावित दुष्प्रभावों को लेकर एक स्थानीय न्यूज़ पोर्टल के पत्रकार द्वारा लगातार शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं। आरोप है कि यह अपशिष्ट न केवल पर्यावरण बल्कि मानव और पशु स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन सकता है।

प्रशासनिक जांच, लेकिन संदेह खत्म नहीं

शिकायतों के बाद एसडीएम बड़वाह के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने फैक्ट्री परिसर का निरीक्षण किया। टीम में तहसीलदार, महिला पटवारी सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे। निरीक्षण के बाद एसडीएम ने कहा कि जांच के दौरान न तो DWGS का अवैध निष्कासन पाया गया और न ही खेतों में दूषित पानी छोड़े जाने की पुष्टि हुई।

हालांकि, शिकायतकर्ता और स्थानीय नागरिक इस निष्कर्ष से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि निरीक्षण केवल औपचारिकता तक सीमित रहा और वास्तविक स्थिति को नजरअंदाज किया गया।

अधिकारियों की आंखों में धूल? गलत यूनिट दिखाकर क्लीन चिट लेने का आरोप

शिकायतकर्ता का आरोप है कि निरीक्षण के दौरान उन्हें फैक्ट्री गेट से आगे नहीं जाने दिया गया, जबकि वे प्लांट की वास्तविक गतिविधियों से भली-भांति परिचित हैं। उनका दावा है कि पूर्व में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, इंदौर के निरीक्षण के दौरान भी कंपनी द्वारा अधिकारियों को एक अलग DDGS यूनिट दिखाई गई थी, जबकि वास्तविक DWGS प्लांट किसी अन्य स्थान पर संचालित हो रहा था। इस संबंध में उन्होंने उस समय भी अधिकारियों को जानकारी दी थी।

बयानों में विरोधाभास

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और स्थानीय प्रशासन के बयानों में भी असंगति सामने आ रही है। हालिया निरीक्षण में बोर्ड के एक अधिकारी ने प्लांट को चालू बताया था, लेकिन इसके बावजूद न तो उसे सील किया गया और न ही तत्काल कठोर कार्रवाई हुई। उस समय यह कहकर मामला टाल दिया गया कि कंपनी को सुधार के लिए समय दिया जा रहा है।

द विराट केसरी पड़ताल: क्या मुनाफे के लिए दांव पर लगा है पशु और जन स्वास्थ्य?

इस पूरे मामले की पड़ताल जब “द विराट केसरी” की टीम ने की, तो आरोप और गंभीर होते नजर आए। टीम का दावा है कि भूसी के नाम पर बेचा जा रहा DWGS कंपनी के लिए मुनाफे का बड़ा जरिया बन चुका है। कुछ स्थानीय सूत्रों ने यहां तक आरोप लगाया कि जांच के दौरान कुछ अधिकारियों को कथित रूप से प्रभावित कर “क्लीन चिट” दिलवाने की कोशिशें भी होती रही हैं। शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज़ इन आशंकाओं को बल देते हैं।

SDM का पक्ष: निरीक्षण से 3 दिन पहले ही बंद थी यूनिट

इस पूरे मामले पर एसडीएम बड़वाह ने “द विराट केसरी” से चर्चा में बताया कि शिकायत मिलने के बाद वे टीम के साथ निरीक्षण के लिए पहुंचे थे, लेकिन संबंधित यूनिट निरीक्षण से 3 दिन पूर्व ही बंद थी।

एसडीएम के अनुसार,
“मौके पर DWGS का प्रत्यक्ष निष्कासन या परिवहन नहीं मिला। दस्तावेजों की जांच की गई, लेकिन कागजों और मौके की स्थिति में सीधा सामंजस्य नहीं पाया गया।”

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पशु आहार के लिए केवल सूखी भूसी (DDGS) ही अनुमन्य है, जबकि शिकायत तरल मिश्रण वाली सामग्री की सप्लाई को लेकर हैं।

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जनता पूछ रही है सवाल

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि-

  • क्या DWGS को पशु आहार के रूप में बेचने पर वास्तव में रोक लगेगी?
  • क्या वर्षों से चल रहे कथित अवैध कारोबार की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होगी?
  • और क्या जांच के दायरे में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी आएगी?

प्रशासनिक आश्वासनों के बाद भी क्षेत्रवासियों की निगाहें अब केवल ठोस और दिखाई देने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं, क्योंकि कागजी जांच से संदेह दूर होने के बजाय और गहराता जा रहा है।

अंकित कीवे
अंकित कीवेhttps://theviratkesari.com/
अंकित कीवे एक अनुभवी पत्रकार, ब्लॉगर और 'द विराट केसरी' के मुख्य संपादक हैं। उन्होंने वर्ष 2015 में सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की, लेकिन समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी और बेबाक लेखन के शौक ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में ला खड़ा किया। साल 2020 से वे लगातार डिजिटल मीडिया, ब्लॉगिंग और प्रिंट मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने अनुभव और दूरदृष्टि के साथ, वे पिछले एक साल से 'द विराट केसरी' समाचार पत्र का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। एक संपादक के तौर पर अंकित का दृढ़ विश्वास है कि सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता ही लोकतंत्र का आधार है। अपने न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से वे विशेष रूप से मध्य प्रदेश, स्थानीय प्रशासन, क्राइम और आम जनता से जुड़े उन मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं, जिनका सीधा असर समाज पर पड़ता है।
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