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बड़वाह: नर्मदा के घाटों पर ‘पीला पंजा’ बेखौफ! संदिग्ध टोकन और बिना रॉयल्टी के रेत का अवैध खेल, माइनिंग विभाग की चुप्पी पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल!

बड़वाह। जिले में नर्मदा नदी से रेत उत्खनन और परिवहन को लेकर एक बार फिर शिकायतें सामने आई हैं। स्थानीय स्तर पर प्राप्त जानकारियों और ग्रामीणों के बयानों के आधार पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि बड़वाह ब्लॉक और महेश्वर क्षेत्र के कुछ नर्मदा तट के घाटों के आसपास बिना वैध अनुमति रेत निकासी और परिवहन की गतिविधियां जारी हैं।

माइनिंग विभाग के अधिकारी को इस सम्बन्ध मे लोगों द्वारा अनेकों बार शिकायत कि जाती रही है मगर कार्यवाही के नाम पर औपचारिकता बन कर रह गई। हालांकि संबंधित विभाग की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक पुष्टि अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

बिना रॉयल्टी और संदिग्ध टोकन पर परिवहन के आरोप

स्थानीय स्रोतों और ग्रामीणों का कहना है कि कुछ स्थानों पर ट्रैक्टर-ट्रॉली और डंपर और मशीनों के माध्यम से रेत का उतखनन और परिवहन किया जा रहा है। आरोप है कि कई वाहनों पर वैध रॉयल्टी रसीद उपलब्ध नहीं होती, जबकि कुछ मामलों में पुराने या संदिग्ध टोकन उपयोग किए जाने की बात कही जा रही है। इन दावों की स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि अभी शेष है।

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नदी किनारे गड्ढे और भू-कटाव की आशंका

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि नर्मदा तट के आसपास कुछ जगहों पर मशीन द्वारा गहरी खुदाई के निशान दिखाई दे रहे हैं। उनका कहना है कि यदि अनियंत्रित उत्खनन जारी रहा तो नदी के प्राकृतिक प्रवाह, तटीय भूमि और आसपास के कृषि क्षेत्र पर प्रभाव पड़ सकता है। पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर कोई अधिकृत सर्वे रिपोर्ट फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।

कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल

क्षेत्रीय स्तर पर यह भी कहा जा रहा है कि अवैध उत्खनन की शिकायतें समय-समय पर संबंधित विभागों तक पहुंचाई गई हैं। कुछ मामलों में वाहनों पर चालानी कार्रवाई होने की जानकारी भी सामने आती रही है, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि व्यापक स्तर पर स्थायी रोक जैसी कार्रवाई दिखाई नहीं देती। इन दावों पर प्रशासनिक पक्ष आना अभी बाकी है।

राजस्व और नियमन पर चिंता

खनन नियमों के जानकारों का कहना है कि यदि कहीं भी बिना अनुमति उत्खनन या परिवहन होता है तो इससे शासन को राजस्व हानि और पर्यावरणीय जोखिम दोनों हो सकते हैं। इसलिए नियमित निरीक्षण, सत्यापन और डिजिटल रॉयल्टी मॉनिटरिंग जैसे उपायों को प्रभावी रूप से लागू करना आवश्यक माना जाता है।

प्रशासन और संबंधित विभाग का पक्ष अपेक्षित

इस संबंध में खनन एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों का पक्ष जानने का प्रयास किया गया है। विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा, ताकि स्थिति का स्पष्ट चित्र सामने आ सके।

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प्रमुख प्रश्न जिन पर स्पष्टता जरूरी

  • क्या संबंधित क्षेत्रों में रेत उत्खनन पूरी तरह स्वीकृत पट्टों के अंतर्गत हो रहा है?
  • परिवहन में उपयोग हो रहे टोकन और रॉयल्टी दस्तावेजों का सत्यापन कैसे किया जा रहा है?
  • तटीय क्षेत्रों के संरक्षण के लिए कौन से निगरानी उपाय लागू हैं?

इन बिंदुओं पर आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

आर्यन सिंह
आर्यन सिंहhttps://theviratkesari.com/
स्थानीय मामलों पर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले हमारे मुख्य लेखक। इनका ध्यान मध्य प्रदेश के हर जिले की ज़मीनी हकीकत, सामुदायिक विकास और प्रशासन से जुड़ी प्रासंगिक खबरों को सामने लाने पर रहता है।
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