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ओंकारेश्वर में आस्था से महा-खिलवाड़: घाट पर बने पेशाब घर और वाशरूम का गंदा पानी सीधे मां नर्मदा में, कुंभकर्णी नींद में प्रशासन

अंकित कीवे (संपादक द विराट केसरी)। मध्य प्रदेश की पवित्र तीर्थनगरी और देश के 12 प्रमुख ज्योतिर्लिंगों में शुमार ओंकारेश्वर से एक बेहद शर्मनाक और विचलित करने वाली तस्वीर सामने आई है। करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र और जीवनदायिनी मानी जाने वाली मां नर्मदा की पवित्रता के साथ यहां सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है।

नर्मदा घाट के ठीक किनारे बने एक सार्वजनिक पेशाब घर (वाशरूम) की गंदी नाली का पानी बिना किसी रोक-टोक के सीधे नर्मदा नदी में प्रवाहित हो रहा है। इस गंभीर मामले ने स्थानीय प्रशासन, नगर परिषद और मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की कार्यप्रणाली की पोल खोलकर रख दी है।

जमीनी हकीकत ने खोली ‘स्वच्छता अभियानों’ की पोल

​तीर्थनगरी ओंकारेश्वर के घाटों पर बदहाली का एक ऐसा शर्मनाक नजारा सामने आया है, जो प्रशासन के तमाम स्वच्छता अभियानों की पोल खोलने के लिए काफी है। घाट के ठीक किनारे एक सार्वजनिक वाशरूम और पेशाब घर संचालित हो रहा है।

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प्रशासन की घोर लापरवाही का आलम यह है कि इस मूत्रालय से निकलने वाला बदबूदार पानी और मल-मूत्र एक खुली नाली के जरिए बेरोकटोक सीधे जीवनदायिनी नर्मदा के पवित्र जल में मिल रहा है। इतना ही नहीं, इस गंदे नाले के आसपास भारी मात्रा में प्लास्टिक की बोतलें, पन्नियां और कचरे का अंबार लगा हुआ है, जिसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।

सबसे बड़ी विडंबना यह है कि जिस स्थान पर यह गंदा पानी नदी में प्रवाहित हो रहा है, ठीक उसी के आसपास नावें संचालित हो रही हैं और अनजान श्रद्धालु उसी दूषित जल में आस्था की डुबकी लगाने को मजबूर हैं।

पाप धोने आते हैं श्रद्धालु, ले जा रहे गंदगी और बीमारियां

नर्मदा नदी केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। दूर-दराज के राज्यों से श्रद्धालु ओंकारेश्वर में इस आस के साथ आते हैं कि नर्मदा के पवित्र जल में डुबकी लगाने से उनके पाप धुल जाएंगे।

लेकिन घाटों की यह दुर्दशा देखकर सवाल उठता है कि क्या श्रद्धालु अनजाने में इसी दूषित और मल-मूत्र वाले पानी में आचमन और स्नान करने को मजबूर हैं? प्रशासन की इस घोर लापरवाही के कारण श्रद्धालु पुण्य के बजाय अपने साथ गंदगी और संक्रामक बीमारियां लेकर जा रहे हैं।

जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर उठते तीखे सवाल

यह कोई छिपी हुई जगह नहीं है, बल्कि उस घाट का दृश्य है जहां से प्रति-दिन हजारों लोग गुजरते हैं। ऐसे में स्थानीय प्रशासनिक अमले की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है:

अनुमति किसने दी?

घाट के ठीक ऊपर और नदी के इतने करीब सार्वजनिक पेशाब घर या वाशरूम बनाने की अनुमति किस अधिकारी या विभाग ने दी?

फंड का क्या हुआ?

नमामि नर्मदे और नर्मदा संरक्षण के नाम पर हर साल करोड़ों रुपये का बजट आवंटित होता है, फिर ओंकारेश्वर जैसे प्रमुख तीर्थ स्थल पर सीवेज ट्रीटमेंट की यह बदतर स्थिति क्यों है?

अधिकारी मौन क्यों?

क्या स्थानीय एसडीएम, तहसीलदार और नगर परिषद के सीएमओ (CMO) को नर्मदा में सीधे मिल रहे इस गंदे नाले की जानकारी नहीं है? या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गई हैं?

प्रदूषण बोर्ड कहां है?

नदियों के प्रदूषण की निगरानी करने वाला प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस खुले उल्लंघन पर नोटिस जारी कर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है?

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से सख्त कार्रवाई की मांग!

प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लगातार धार्मिक स्थलों के विकास और नदियों के संरक्षण पर जोर दे रहे हैं। ऐसे में ओंकारेश्वर से आई यह तस्वीर सरकार के दावों को भी चुनौती दे रही है। सोशल मीडिया पर आम जनता और श्रद्धालु इस वीडियो को मुख्यमंत्री को टैग कर रहे हैं।

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मांग उठ रही है कि इस मामले में तत्काल संज्ञान लिया जाए और नर्मदा की पवित्रता को दूषित करने वाले इस पेशाब घर के नाले को तुरंत बंद किया जाए। अब देखना यह है कि इस खबर के सामने आने के बाद कुंभकर्णी नींद सो रहा स्थानीय प्रशासन कब जागता है, या फिर “नर्मदा मैया” की पवित्रता को इसी तरह कागजी नारों और भ्रष्ट सिस्टम की भेंट चढ़ने दिया जाएगा।

यह खबर केवल एक नाले के बहने की नहीं है, यह करोड़ों सनातनी हिंदुओं की आस्था पर सीधा प्रहार है। जब तक इस महापाप के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई नहीं होती, तब तक घाटों के सौंदर्यीकरण के तमाम दावे बेमानी साबित होंगे।

आर्यन सिंह
आर्यन सिंहhttps://theviratkesari.com/
स्थानीय मामलों पर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले हमारे मुख्य लेखक। इनका ध्यान मध्य प्रदेश के हर जिले की ज़मीनी हकीकत, सामुदायिक विकास और प्रशासन से जुड़ी प्रासंगिक खबरों को सामने लाने पर रहता है।
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