इस ख़बर की प्रमुख बातें:
- अफवाह से दहशत: डीपी के पास करंट फैलने की झूठी खबर के बाद कतार में अचानक मची अफरा-तफरी।
- गिरे टेंट और बैरिकेड्स: आरती के बाद जैसे ही गेट खुले, बेकाबू भीड़ के दबाव में बैरिकेड्स धराशायी हो गए।
- कई श्रद्धालु घायल: मध्य प्रदेश, गुजरात और बिहार से आए कई भक्तों को गंभीर चोटें आईं, चरक अस्पताल में चल रहा इलाज।
- प्रशासन पर उठे सवाल: पीड़ितों का आरोप- हादसे के बाद आधे घंटे तक कोई मदद नहीं मिली, वीआईपी दर्शन को दी जा रही तवज्जो।
अंकित कीवे (संपादक द विराट केसरी) उज्जैन। आस्था के महापर्व नाग पंचमी पर भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब सोमवार को एक बड़े हादसे का शिकार हो गया। हरसिद्धि मंदिर चौराहे के पास दर्शनार्थियों की लंबी कतार में अचानक भगदड़ (Stampede) मच गई।
बैरिकेडिंग के अंदर डीपी (ट्रांसफार्मर) के पास करंट फैलने की एक अफवाह उड़ी, जिससे दहशत में आए लोग इधर-उधर भागने लगे। इस अफरा-तफरी के बीच टेंट और भारी लोहे के बैरिकेड्स टूटकर गिर पड़े, जिसके नीचे दबने से कई श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गए। आनन-फानन में सभी घायलों को उज्जैन के चरक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
इन श्रद्धालुओं को आईं गंभीर चोटें
हादसे में घायल होने वालों में स्थानीय लोगों के साथ-साथ अन्य राज्यों के श्रद्धालु भी शामिल हैं। इनमें गुजरात के हरिश्चंद्र के पैरों में गंभीर चोटें आई हैं। इसके अलावा उज्जैन के ढांचा भवन निवासी हिंदू बाई, लक्ष्मीबाई और 19 वर्षीय सागर, गंजबासौदा की अनसूया व उनकी मां ममता, ग्वालियर की 18 वर्षीय सोनम और खुशी, वलसाड (गुजरात) की रेखा बाई व उनकी बेटी तुलसी, और दरभंगा (बिहार) के सुजीत कुमार घायल हुए हैं। घटना के बाद कुछ देर के लिए दर्शन व्यवस्था चरमरा गई, हालांकि बाद में भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अमले ने स्थिति को नियंत्रण में लिया।
आधे घंटे तक सड़क पर तड़पता रहा, किसी ने नहीं की मदद
इस हादसे ने मंदिर प्रशासन के दावों और चाक-चौबंद व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है। हादसे में बुरी तरह घायल हुए 19 वर्षीय सागर और उनकी मां मीनू ने जो आंखों देखा हाल बताया, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है।
मीनू ने बताया कि उनका बेटा भीड़ के दबाव में बैरिकेड्स के नीचे दब गया था, लेकिन प्रशासन या मंदिर समिति की ओर से कोई मदद नहीं आई। एक अज्ञात व्यक्ति ने मानवता दिखाते हुए उन्हें उठाया और अस्पताल पहुंचाया।
सागर ने बताया कि वे 7-8 घंटे का लंबा सफर तय करके उज्जैन पहुंचे थे और रात 1 बजे से कतार में लगे थे। आरती के समय लाइन करीब 2 घंटे तक रोक दी गई। इसके बाद जैसे ही गेट खुले, पीछे से अचानक भारी दबाव आया। टेंट और बैरिकेड्स गिर पड़े और उसके दोनों पैर लोहे के बैरिकेड्स के नीचे फंस गए।
सागर के मुताबिक, “मैंने जैसे-तैसे अपना एक पैर निकाला, लेकिन दूसरा पैर बुरी तरह कुचल गया। मुझे ऐसा लग रहा है जैसे हड्डियां चूर-चूर हो गई हों।” पीड़ित युवक का दर्द यहीं खत्म नहीं हुआ, उसने बताया कि वह दर्द से तड़पते हुए आधे घंटे तक पुलिस वालों से मदद की गुहार लगाता रहा, लेकिन किसी ने नहीं सुनी।
बाद में एक बाहरी व्यक्ति ने उसे हरसिद्धि माता मंदिर के पास लगे हेल्थ कैंप तक पहुंचाया, जिसके भी आधे घंटे बाद एंबुलेंस मौके पर आई।
वीआईपी कल्चर पर फूटा आम भक्तों का गुस्सा
हादसे के शिकार श्रद्धालुओं में मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर भारी रोष है। पीड़ितों का सीधा आरोप है कि पूरी व्यवस्था चरमराई हुई थी और आम श्रद्धालुओं को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया था। घायल युवक और अन्य श्रद्धालुओं ने आरोप लगाया कि 300 रुपये की रसीद कटवाकर वीआईपी दर्शन करने वालों को तो सारी सुख-सुविधाएं और सीधा प्रवेश दिया जा रहा था, लेकिन आम लोगों को घंटों कतार में धक्के खाने पड़े।
रविवार को भी इसी तरह के हालात थे, जहां मानसरोवर के पास आम लोगों को 4-4 घंटे तक लाइन में खड़ा रखा गया। इस घटना के बाद महाकाल मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन की भीड़ प्रबंधन की रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन अब मामले की जांच कर रहा है, लेकिन श्रद्धालुओं के मन में इस भयानक अनुभव का खौफ साफ देखा जा सकता है।





