मुख्य बिंदु:
- कपाट खुलने का समय: साल भर में केवल एक बार खुलने वाले पट रविवार रात 12 बजे खोले गए।
- कतार में प्रवेश: श्रद्धालु आज (सोमवार) रात 9 बजे तक ही दर्शन के लिए लाइन में लग सकेंगे।
- अभेद्य सुरक्षा: 2400 जवानों, 10 अत्याधुनिक ड्रोन और 200 कैमरों से निगरानी।
- विशेष परंपरा: महाकाल बाबा के शीश पर आज रजत (चांदी) का शेषनाग सुशोभित होगा।
अंकित कीवे (संपादक विराट केसरी) उज्जैन। नागपंचमी के पावन पर्व पर शिवभक्तों के लिए विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में आस्था का भव्य मेला सज गया है। वर्ष में सिर्फ एक दिन यानी 24 घंटे के लिए खुलने वाले भगवान नागचंद्रेश्वर महादेव के कपाट रविवार मध्यरात्रि ठीक 12 बजे खोल दिए गए।
कपाट खुलते ही पूरा परिसर जयकारों से गूंज उठा। दर्शन का यह पुण्य सिलसिला सोमवार रात 12 बजे तक लगातार चलता रहेगा। हालांकि, मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दर्शनार्थियों को कतार में लगने की अनुमति केवल सोमवार रात 9 बजे तक ही दी जाएगी, उसके बाद बैरिकेड्स बंद कर दिए जाएंगे।
अन्य राज्यों से उमड़ा आस्था का सैलाब, पार्किंग स्थल फुल
भगवान नागचंद्रेश्वर की एक झलक पाने के लिए रविवार सुबह से ही श्रद्धालुओं का रेला उज्जैन पहुंचने लगा था। पड़ोसी राज्यों- गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान से बड़ी तादाद में भक्त गाड़ियों में सवार होकर यहाँ पहुंचे। भारी भीड़ के चलते रविवार शाम तक ही मंदिर के आस-पास बनाए गए सभी पार्किंग जोन पूरी तरह पैक हो गए। श्रद्धालुओं का उत्साह इतना चरम पर था कि वे पट खुलने से 6 घंटे पहले, शाम 6 बजे से ही लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करने लगे थे।
चांदी के शेषनाग से सजे महाकाल, जानें आज की पूजन रूपरेखा
महाकाल मंदिर की पौराणिक परंपरा के अनुसार, नागपंचमी पर भगवान महाकाल को विशेष रूप से चांदी का शेषनाग धारण कराया जाता है। वहीं, शिखर पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर में आज की विशेष पूजन-आरती का क्रम इस तरह तय किया गया है:
- दोपहर 12:00 बजे (शासकीय पूजन): प्रशासनिक परंपरा का निर्वहन करते हुए उज्जैन कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भगवान की शासकीय पूजा करेंगे।
- शाम 07:30 बजे: भगवान महाकाल की सांध्य आरती संपन्न होने के बाद, मंदिर के पुजारियों और पुरोहितों द्वारा नागचंद्रेश्वर महादेव की विशेष आराधना की जाएगी।
- रात 12:00 बजे: महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा अंतिम और विशेष आरती की जाएगी। इसके तुरंत बाद मंदिर के पट पुनः एक साल के लिए मंगल कर दिए जाएंगे।
सुरक्षा और मेडिकल इमरजेंसी के चाक-चौबंद इंतजाम
लाखों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की सुगमता और सुरक्षा के लिए प्रशासन ने एक बड़ा चक्रव्यूह तैयार किया है। पूरे परिसर की सुरक्षा 2400 पुलिस जवानों के जिम्मे है। इसके अलावा 200 सीसीटीवी कैमरों और 10 ड्रोन्स के जरिए आसमान से भी चप्पे-चप्पे पर नजर रखी जा रही है। किसी भी स्वास्थ्य आपातकाल से निपटने के लिए 16 अलग-अलग मेडिकल हेल्प डेस्क बनाए गए हैं, जहां 70 डॉक्टर्स और 200 पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती की गई है।
दर्शनार्थियों के लिए प्रवेश और निकास मार्ग (Route Map)
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने दो अलग-अलग मार्ग निर्धारित किए हैं:
- सामान्य (नि:शुल्क) दर्शन मार्ग: आम श्रद्धालु कर्कराज पार्किंग से अपनी कतार शुरू करेंगे। यह लाइन भील समाज धर्मशाला, गोंड मोहल्ला, चारधाम, हरसिद्धि चौराहा और बड़ा गणेश मंदिर होते हुए गेट नंबर-4 से मंदिर में प्रवेश करेगी। विश्रामधाम से भगवान के दर्शन करने के बाद ये श्रद्धालु चौबीस खंभा माता मंदिर मार्ग होते हुए वापस कर्कराज पार्किंग तक पहुंचेंगे।
- शीघ्र दर्शन मार्ग: फास्ट ट्रैक टिकट वाले श्रद्धालुओं को हरसिद्धि चौराहा से प्रवेश मिलेगा। यहाँ से बड़ा गणेश मंदिर के सामने होते हुए वे गेट नंबर-5 से विश्रामधाम पहुंचेंगे। दर्शन के पश्चात इनकी वापसी चौबीस खंभा माता मंदिर मार्ग से हरसिद्धि पाल की तरफ होगी।
एयरो ब्रिज की टेस्टिंग के तरीके पर उठे सवाल
वर्ष 2022 में मंदिर परिसर के विश्राम धाम से नागचंद्रेश्वर मंदिर को जोड़ने के लिए एक ‘एयरो ब्रिज’ बनाया गया था। शनिवार को इस पुल की भार क्षमता और मजबूती परखने के लिए एक अजीब तरीका अपनाया गया, जिसने विवाद खड़ा कर दिया है।
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कोर कंपनी के 300 निजी सुरक्षाकर्मियों को इस ब्रिज पर एक साथ जंप (कूदने) के लिए कहा गया। मंदिर समिति का तर्क है कि यह स्ट्रक्चर की जांच का हिस्सा था। वहीं, कुछ विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों ने इस तरीके को अवैज्ञानिक और जोखिम भरा बताते हुए कहा है कि इसकी टेस्टिंग इंजीनियरिंग के आधुनिक मानकों के अनुरूप ही होनी चाहिए।





