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खंडवा के पुनासा में 21 साल पुराने जमीन रिकॉर्ड पर विवाद, SDM के स्थगन आदेश पर उठे सवाल, वारिस प्रमाण पत्र भी जांच के घेरे में!

राकेश तिवारी ब्यूरो खंडवा। पुनासा तहसील के ग्राम इनपुन स्थित खसरा नंबर 307/3 (रकबा 1.83 हेक्टेयर) भूमि को लेकर प्रशासनिक स्तर पर विवाद सामने आया है। इस प्रकरण में एसडीएम पुनासा द्वारा जारी किए गए स्थगन आदेश को लेकर संबंधित पक्षों ने आपत्ति जताई है।

आरोप है कि यह आदेश बिना पूर्व सूचना और सुनवाई के जारी किया गया, जबकि भूमि से जुड़े नामांतरण और अन्य रिकॉर्ड लंबे समय से प्रभावी बताए जा रहे हैं।

21 वर्ष पुराने रिकॉर्ड का हवाला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, संबंधित भूमि का नामांतरण वर्ष 2004 में किया गया था और वर्ष 2008 में पंजीकृत विक्रय के माध्यम से स्वामित्व परिवर्तन हुआ। इसके बाद लगभग 17 वर्षों तक इस पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं की गई। बताया जा रहा है कि हाल ही में कॉलोनी विकास से जुड़ी अनुमति प्रक्रिया के दौरान विवाद उभरकर सामने आया।

क्या कहता है नियम?

राजस्व नियमों के अनुसार, किसी भी पुराने नामांतरण या पंजीकृत विक्रय पत्र के विरुद्ध स्थगन आदेश (Stay Order) जारी करने से पहले सभी संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है। प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि बिना पक्ष सुने एकतरफा आदेश जारी करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है। ऐसे मामलों में रिकॉर्ड की सूक्ष्म जांच और दोनों पक्षों की दलीलें सुनना कानूनन आवश्यक माना जाता है।

स्थगन आदेश की प्रक्रिया पर उठे प्रश्न

सूत्रों का कहना है कि स्थगन आदेश जारी करने से पहले संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। प्रशासनिक जानकारों के अनुसार, इस तरह के मामलों में दोनों पक्षों को सुनना आवश्यक माना जाता है। इस आधार पर आदेश की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

वारिस प्रमाण पत्र को लेकर भी विवाद

मामले में एक अन्य पहलू वारिस प्रमाण पत्र से जुड़ा है। आरोप है कि कुछ व्यक्तियों द्वारा स्वयं को संबंधित भूमि के पूर्व स्वामी का वारिस बताते हुए दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। हालांकि, राजस्व रिकॉर्ड और पुरानी मतदाता सूचियों में पिता का नाम अलग दर्ज होने का उल्लेख किया जा रहा है। इस आधार पर पंचायत स्तर पर जारी किए गए प्रमाण पत्रों की वैधता पर प्रश्न खड़े हुए हैं।

तहसील जांच रिपोर्ट का उल्लेख

सूत्रों के अनुसार, पूर्व में तहसील स्तर पर की गई एक जांच रिपोर्ट में भूमि को लावारिस बताया गया था और किसी वैध दावेदार की पुष्टि नहीं हुई थी। अब इस रिपोर्ट को ध्यान में न रखे जाने को लेकर भी आपत्तियां सामने आई हैं।

वैध खरीदार ने जताई आपत्ति

भूमि के वर्तमान स्वामी की ओर से कहा गया है कि स्थगन आदेश के कारण विकास कार्य प्रभावित हुए हैं और आर्थिक व मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया था, इसके बावजूद कार्य रोक दिया गया।

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प्रशासन से जांच की मांग

प्रकरण को लेकर संबंधित पक्षों और स्थानीय स्तर पर यह मांग की जा रही है कि-

  1. वारिस प्रमाण पत्रों की वैधता की जांच की जाए।
  2. पंचायत एवं राजस्व स्तर पर जारी दस्तावेजों की समीक्षा हो।
  3. स्थगन आदेश पर पुनर्विचार किया जाए।

फिलहाल इस पूरे मामले में जिला प्रशासन या एसडीएम कार्यालय की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जांच या आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार किया जा रहा है।

अंकित कीवे
अंकित कीवेhttps://theviratkesari.com/
अंकित कीवे एक अनुभवी पत्रकार, ब्लॉगर और 'द विराट केसरी' के मुख्य संपादक हैं। उन्होंने वर्ष 2015 में सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की, लेकिन समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी और बेबाक लेखन के शौक ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में ला खड़ा किया। साल 2020 से वे लगातार डिजिटल मीडिया, ब्लॉगिंग और प्रिंट मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने अनुभव और दूरदृष्टि के साथ, वे पिछले एक साल से 'द विराट केसरी' समाचार पत्र का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। एक संपादक के तौर पर अंकित का दृढ़ विश्वास है कि सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता ही लोकतंत्र का आधार है। अपने न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से वे विशेष रूप से मध्य प्रदेश, स्थानीय प्रशासन, क्राइम और आम जनता से जुड़े उन मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं, जिनका सीधा असर समाज पर पड़ता है।
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