प्रमुख बातें:
- शर्मनाक करतूत: बागली विकासखंड के भीकूपुरा प्राथमिक विद्यालय में छोटे बच्चों से कराया गया निर्माण कार्य।
- वायरल हुआ वीडियो: ग्रामीणों ने मासूमों को गिट्टी ढोते देख बनाया वीडियो, सोशल मीडिया पर मच गया बवाल।
- प्रबंधन का बेतुका तर्क: मजदूरी को बताया बच्चों का ‘सहयोग’, DEO ने दलील खारिज कर दिए कड़ी कार्रवाई के निर्देश।
- लचर मॉनिटरिंग: जिले में बीएससी और बीआरसी के पद प्रभारियों के भरोसे, स्कूलों की निगरानी व्यवस्था पड़ी है ठप्प।
अंकित कीवे (देवास, द विराट केसरी)। मध्य प्रदेश के देवास जिले से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली एक तस्वीर सामने आई है। जिले के बागली विकासखंड के अंतर्गत आने वाले भीकूपुरा के एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले नौनिहालों के हाथों में किताब-कलम की जगह तगारी और फावड़े थमा दिए गए।
स्कूल में मासूम बच्चों से निर्माण कार्य (मजदूरी) कराने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। इस गंभीर लापरवाही के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
वीडियो वायरल होते ही नींद से जागा विभाग
जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुआ, देवास जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) राजीव सूर्यवंशी ने तत्काल प्रभाव से मामले का संज्ञान लिया। उन्होंने इस पूरी घटना की सघन जांच के आदेश दे दिए हैं।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बच्चों से यह श्रम कराने के लिए जिम्मेदार माने जा रहे शिक्षक को निलंबित (Suspend) करने की तैयारी की जा रही है।
‘सहयोग’ के नाम पर मासूमों से करवाई मजदूरी
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से स्कूल परिसर में फर्श लगाने और मरम्मत का कार्य चल रहा था। इसी दौरान स्कूल में पढ़ने वाले छोटे बच्चों से गिट्टी और रेत ढुलवाने का काम लिया जा रहा था। मौके से गुजर रहे एक जागरूक नागरिक ने इस पूरी घटना को अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया।
जब इस शर्मनाक वीडियो पर स्कूल प्रबंधन से जवाब-तलब किया गया, तो उन्होंने इसे ‘मजदूरी’ मानने से ही इनकार कर दिया। प्रबंधन ने अपनी नाकामी छिपाते हुए अजीबोगरीब तर्क दिया कि बच्चों ने अपनी इच्छा से स्कूल के काम में ‘सहयोग’ किया है।
DEO ने दलील की खारिज, कार्रवाई तय
जिला शिक्षा अधिकारी ने स्कूल प्रबंधन की इस बेतुकी दलील को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि स्कूली बच्चों से ऐसा कोई भी शारीरिक श्रम या मजदूरी कराना पूरी तरह से नियम विरुद्ध है। फिलहाल शिक्षा विभाग की टीम विस्तृत जानकारी जुटा रही है, जिसके बाद दोषियों पर सख्त कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
प्रभारियों के भरोसे सिस्टम, कैसे रुकेगी मनमानी?
यह पूरी घटना जिले की चरमराई विभागीय मॉनिटरिंग व्यवस्था की भी पोल खोल रही है। जानकारी के मुताबिक, वर्तमान में जिले के अंदर बीएससी (BSC), बीआरसी (BRC) और एपीसी (APC) जैसे निरीक्षण के महत्वपूर्ण पद केवल प्रभारियों के भरोसे चल रहे हैं।
नियमित अधिकारियों की नियुक्ति न होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों का औचक निरीक्षण नहीं हो पा रहा है, जिसका फायदा उठाकर स्कूलों में ऐसी मनमानी को अंजाम दिया जा रहा है।





