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​इंदौर: ग्रेटर बायपास परियोजना अटकी, जमीन मालिकों के विरोध से पूर्वी हिस्से का सर्वे रुका, जानें 6000 करोड़ का पूरा अपडेट

स्थानीय रिपोर्टर​ इंदौर: शहर में बढ़ते यातायात दबाव को कम करने के लिए करीब दो वर्ष पहले ग्रेटर बायपास विकसित करने की योजना शुरू की गई थी। इस योजना के अनुसार बायपास को पूर्वी और पश्चिमी दो हिस्सों में बनाया जाना है।

पश्चिमी भाग में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ चुकी है और निर्माण के लिए टेंडर भी जारी किया जा चुका है, जबकि पूर्वी हिस्से में सर्वेक्षण तक शुरू नहीं हो सका है। जमीन मालिकों द्वारा सर्वे टीम को कार्य नहीं करने देने से प्रक्रिया अटक गई है।

​पूर्वी बायपास: पहले रद्द हुए टेंडर, अब सर्वे में बाधा

​मौजूदा बायपास की क्षमता कम पड़ने पर एनएचएआई (NHAI) ने नए बायपास की योजना तैयार की थी। शुरुआत में दोनों हिस्सों का निर्माण एनएचएआई के माध्यम से होना था और इसके लिए अलग-अलग टेंडर जारी किए गए थे। बाद में एमपीआरडीसी के पास पूर्वी और एनएचएआई के पास पश्चिमी बायपास का दायित्व तय किया गया, जिसके क्रम में पूर्वी बायपास के टेंडर रद्द कर दिए गए थे।

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​पश्चिमी हिस्से पर कार्य आगे बढ़ता रहा, लेकिन पूर्वी बायपास की प्रक्रिया थम गई। बाद में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के हस्तक्षेप से पूर्वी बायपास का कार्य पुनः एनएचएआई को सौंपा गया। अब यहां सर्वे और टेंडर प्रक्रिया नए सिरे से शुरू की जानी है।

​पश्चिमी बायपास पर कार्य जारी: 5 गांवों की जमीन हुई हस्तांतरित

​पश्चिमी बायपास के लिए प्रशासन ने अब तक पांच गांवों की भूमि एनएचएआई को हस्तांतरित कर दी है। प्रस्तावित 31 गांवों में से निम्न की जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है:

  • जैतपुरा
  • ​मुंडला हुसैन
  • ​धतूरिया
  • ​ब्राह्मण पीपल्या
  • ​एक अन्य गांव

​लगभग 600 हेक्टेयर भूमि पर बनने वाले इस मार्ग का प्रारंभ पीथमपुर से होगा और यह सड़क देपालपुर, हातोद व सांवेर क्षेत्र से होकर गुजरेगी। अधिकारियों का कहना है कि 80 प्रतिशत भूमि मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।

​ग्रेटर बायपास का व्यय अनुमान 6000 करोड़

​पूरे बायपास के निर्माण और जमीन अधिग्रहण पर लगभग 6 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। पश्चिमी हिस्से के दो चरणों के लिए अहमदाबाद की एक कंपनी को ठेके दिए गए हैं:

  1. पहला चरण: 996 करोड़ रुपये
  2. ​दूसरा चरण: 884 करोड़ रुपये

​पूर्वी रिंग रोड के लिए पहले 2100 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए गए थे, जिन्हें अब रद्द कर दिया गया है। नई शर्तों के अनुसार टेंडर पुनः जारी किए जाएंगे।

​पूर्वी बायपास के लिए 47 गांवों में लेन-देन पर रोक

  • ​पूर्वी बायपास के लिए विभाग ने 47 गांवों में खरीद-फरोख्त पर रोक लगाई है। इस परियोजना के मुख्य तथ्य:
  • ​लगभग 640 हेक्टेयर भूमि पर निर्माण प्रस्तावित है।
  • ​यह 77 किलोमीटर लंबा छह लेन मार्ग बनाया जाना प्रस्तावित है।
  • ​यह सड़क मुंबई से देवास की ओर जाने वाले वाहनों को वैकल्पिक मार्ग प्रदान करेगी।
  • ​पूर्वी बायपास के लिए पहले तीन चरणों में 600, 700 और 800 करोड़ रुपये के टेंडर जारी किए गए थे।

​NHAI ने मांगी प्रशासनिक सहायता: प्रोजेक्ट डायरेक्टर का बयान

​एनएचएआई इंदौर के प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रवीण यादव के अनुसार, धारा 3A और 3D के प्रकाशन के बाद सर्वे कार्य प्रारंभ किया गया था, लेकिन स्थानीय विरोध के कारण टीम सर्वे पूरा नहीं कर पा रही है। इंदौर और देवास जिले की भूमि इस प्रक्रिया के दायरे में आती है।

​एनएचएआई ने स्थानीय प्रशासन व पुलिस विभाग से सहयोग प्रदान करने का आग्रह किया है ताकि यह महत्वपूर्ण परियोजना आगे बढ़ सके।

आर्यन सिंह
आर्यन सिंहhttps://theviratkesari.com/
स्थानीय मामलों पर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले हमारे मुख्य लेखक। इनका ध्यान मध्य प्रदेश के हर जिले की ज़मीनी हकीकत, सामुदायिक विकास और प्रशासन से जुड़ी प्रासंगिक खबरों को सामने लाने पर रहता है।
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