खेल विशेषज्ञ: भारतीय वनडे टीम के उपकप्तान श्रेयस अय्यर चोट के चलते साउथ अफ्रीका के खिलाफ होने वाली आगामी वनडे सीरीज से बाहर हो गए हैं। ताज़ा जानकारी के अनुसार, न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे मुकाबलों में उनका खेलना भी कठिन माना जा रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, अय्यर को पूरी तरह फिट होकर टीम में वापसी करने में दो महीने से ज्यादा समय लग सकता है।
टी20 वर्ल्ड कप से पहले वापसी की संभावना कम
साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बाद भारतीय टीम का कार्यक्रम टी20 वर्ल्ड कप 2026 से जुड़ा है। चूंकि अय्यर को टी20 फॉर्मेट में चयनित नहीं किया जाता, इसलिए उनके इस टूर्नामेंट में खेलने की कोई संभावना नहीं है। ऐसे में माना जा रहा है कि अय्यर अब सीधे इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में ही मैदान पर लौट सकते हैं।
सिडनी वनडे के दौरान लगी थी गंभीर चोट
यह चोट 25 अक्टूबर को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी वनडे के दौरान लगी। पीछे दौड़कर कैच लेने की कोशिश में अय्यर असंतुलित होकर जोर से गिरे और उनकी पसलियों में गंभीर चोट आई। जांच में इंटरनल ब्लीडिंग की पुष्टि हुई, जिसके बाद उन्हें आईसीयू में भर्ती कर उपचार दिया गया।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ इस श्रृंखला में अय्यर ने दो मैचों में कुल 72 रन बनाए थे, जिनमें दूसरे वनडे में 61 रन की पारी भी शामिल रही। रिपोर्ट के अनुसार, अय्यर का एक और अल्ट्रासाउंड (USG) स्कैन किया जाएगा, जिसके बाद ही रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।
हीलिंग में सुधार, लेकिन सावधानी के साथ एक्सरसाइज की अनुमति
हाल ही में हुए एक अल्ट्रासाउंड स्कैन की समीक्षा स्पोर्ट्स मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. दिनशॉ पारदीवाला ने की। उन्होंने बताया कि अय्यर की रिकवरी संतोषजनक गति से आगे बढ़ रही है। अब उन्हें सामान्य दिनचर्या गतिविधियों और कुछ बुनियादी एक्सरसाइज करने की अनुमति दी गई है।
मेडिकल टीम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अगले एक महीने तक वे ऐसी किसी गतिविधि से दूर रहें, जिससे पेट के अंदरूनी हिस्से पर अतिरिक्त दबाव पड़े। उनका रिहैबिलिटेशन बीसीसीआई के बेंगलुरु स्थित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) में ही जारी रहेगा।
फिलहाल केवल वनडे फॉर्मेट में सक्रिय
श्रेयस अय्यर वर्तमान में केवल वनडे प्रारूप में सक्रिय हैं। उन्होंने पीठ की समस्या के चलते टेस्ट क्रिकेट से ब्रेक लिया हुआ है और टी20 टीम में भी उन्हें शामिल नहीं किया जाता। अय्यर ने पहले बताया था कि टेस्ट मैचों में लंबी फील्डिंग और अधिक समय तक मैदान पर रहने से उनकी रिकवरी प्रभावित होती है। वहीं वनडे प्रारूप में 50 ओवर फील्डिंग करने से शरीर पर अपेक्षाकृत कम दबाव पड़ता है।






