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कहीं खंडवा भी इंदौर का भागीरथपुरा न बन जाए! नालियों से गुजर रही RO जलापूर्ति लाइन ने बढ़ाई चिंता

खंडवा। शहर की पेयजल व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। नगर निगम द्वारा हाईकोर्ट में जिस जलापूर्ति लाइन को आरओ आधारित शुद्ध पेयजल लाइन बताया गया है, उसकी वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग नजर आ रही है।

नालियों के बीच से गुजर रही पेयजल पाइपलाइन

स्थल निरीक्षण में सामने आया है कि यह जलापूर्ति पाइपलाइन कई स्थानों पर नालियों के बेहद नजदीक, तो कहीं सीधे नाली के भीतर से होकर गुजर रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसी स्थिति में यदि कहीं भी पाइपलाइन में रिसाव हुआ, तो गंदा नाली का पानी सीधे पीने के पानी में मिल सकता है।

स्वास्थ्य संकट की आशंका

जागरूक नागरिकों का मानना है कि इस तरह की लापरवाही से शहर में जलजनित बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो खंडवा में भी भागीरथपुरा जैसी स्थिति बन सकती है, जहां दूषित पानी से जनस्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ा था।

पहले भी दी जा चुकी है सूचना

नागरिकों के अनुसार इस समस्या को लेकर पहले भी नगर निगम को कई बार फोन और मौखिक शिकायतों के माध्यम से अवगत कराया गया है। इसके बावजूद न तो पाइपलाइन की दिशा बदली गई और न ही कोई वैकल्पिक सुरक्षित व्यवस्था की गई।

निगम की चुप्पी पर उठे सवाल

अब सवाल यह उठने लगे हैं कि क्या नगर निगम किसी बड़े हादसे या बीमारी फैलने की प्रतीक्षा कर रहा है? पेयजल जैसी अत्यंत संवेदनशील सेवा में जरा-सी लापरवाही भी आमजन के जीवन और स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

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नागरिकों की मांग

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि नगर निगम तत्काल उन सभी स्थानों का निरीक्षण कराए, जहां जलापूर्ति लाइनें नालियों के संपर्क में हैं। साथ ही संभावित जोखिम को देखते हुए पाइपलाइन का स्थान परिवर्तन कर स्थायी और सुरक्षित समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य आपदा से बचा जा सके।

अंकित कीवे
अंकित कीवेhttps://theviratkesari.com/
अंकित कीवे एक अनुभवी पत्रकार, ब्लॉगर और 'द विराट केसरी' के मुख्य संपादक हैं। उन्होंने वर्ष 2015 में सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की, लेकिन समाज के प्रति उनकी जिम्मेदारी और बेबाक लेखन के शौक ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में ला खड़ा किया। साल 2020 से वे लगातार डिजिटल मीडिया, ब्लॉगिंग और प्रिंट मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने अनुभव और दूरदृष्टि के साथ, वे पिछले एक साल से 'द विराट केसरी' समाचार पत्र का सफलतापूर्वक नेतृत्व कर रहे हैं। एक संपादक के तौर पर अंकित का दृढ़ विश्वास है कि सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता ही लोकतंत्र का आधार है। अपने न्यूज़ पोर्टल के माध्यम से वे विशेष रूप से मध्य प्रदेश, स्थानीय प्रशासन, क्राइम और आम जनता से जुड़े उन मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं, जिनका सीधा असर समाज पर पड़ता है।
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