राम लखन पाठक सिंगरौली। देवसर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत मजौना में कराए गए विकास कार्यों को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। सड़क, नाली, चेक डैम सहित विभिन्न योजनाओं में भ्रष्टाचार और घटिया निर्माण के आरोप लगाते हुए पंचायत के उपसरपंच अनुराग द्विवेदी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लिखित शिकायत सौंपकर निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
अधूरे कार्य, लेकिन पूरा भुगतान
उपसरपंच द्वारा भेजे गए आवेदन में उल्लेख किया गया है कि पंचायत क्षेत्र में कई निर्माण कार्य या तो अधूरे हैं या गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरते। इसके बावजूद संबंधित कार्यों को पूर्ण दर्शाकर शासकीय राशि का भुगतान कर लिया गया, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका गहराती जा रही है।
घटिया सामग्री और नाममात्र निर्माण का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि सड़क निर्माण में निम्न गुणवत्ता की सामग्री का उपयोग किया गया, जिससे कुछ ही समय में सड़कें खराब होने लगीं। वहीं नाली निर्माण और मरम्मत कार्यों में लापरवाही बरती गई। चेक डैम और जल संरक्षण से जुड़े कार्यों में भी वास्तविक निर्माण बेहद सीमित है, जबकि रिकॉर्ड में लाखों रुपये खर्च दिखाए गए हैं।
मस्टर रोल और वित्तीय रिकॉर्ड पर भी संदेह
उपसरपंच ने मस्टर रोल, बिल-बाउचर और अन्य वित्तीय दस्तावेजों में फर्जी प्रविष्टियों की आशंका जताई है। आरोप है कि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत स्वीकृत राशि का सही उपयोग नहीं किया गया और वास्तविक हितग्राही लाभ से वंचित रह गए।
अन्य योजनाओं में भी पारदर्शिता का अभाव
शिकायत में शौचालय निर्माण, स्वच्छता अभियान सहित अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए गए हैं। कई योजनाएं कागजों में पूरी बताई गईं, जबकि जमीनी स्तर पर कार्य अधूरा या नाममात्र का है।
कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ को भी अवगत
पूरे मामले को लेकर सिंगरौली कलेक्टर को शासन स्तर (भोपाल) में आवेदन भेजा गया है। साथ ही जिला पंचायत के सीईओ को भी लिखित शिकायत देकर भौतिक सत्यापन, तकनीकी जांच और वित्तीय ऑडिट कराने की मांग की गई है।
विशेष जांच दल गठित करने की मांग
उपसरपंच अनुराग द्विवेदी ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि ग्राम पंचायत मजौना में कराए गए सभी विकास कार्यों की जांच के लिए जिला स्तरीय विशेष जांच दल का गठन किया जाए, ताकि दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
ग्रामीणों में बढ़ता असंतोष
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं की गई, तो शासन की योजनाओं और प्रशासनिक व्यवस्था पर जनता का भरोसा कमजोर हो सकता है। अब सभी की निगाहें शासन और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।






