न्यूज़ डेस्क: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को कमर्शियल बैंकों, स्मॉल फाइनेंस बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों के लिए डिजिटल बैंकिंग से जुड़े 7 नए मास्टर डायरेक्शन जारी किए हैं। यह कदम डिजिटल लेनदेन को सुव्यवस्थित करने और नियमन से जुड़े अनावश्यक प्रक्रियाओं को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। नए नियम 1 जनवरी 2026 से लागू होंगे।
पुराने नियमों को एकीकृत करने की पहल
RBI ने बताया कि डिजिटल बैंकिंग के नए दिशानिर्देश उसकी उस व्यापक पहल का हिस्सा हैं, जिसके तहत पुराने और बिखरे हुए नियमों को एक जगह एकीकृत किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में बैंकिंग विनियमों से जुड़े 244 मास्टर डायरेक्शन तैयार किए गए हैं, जिनमें से अधिकांश पहले जारी किए गए सर्कुलर और गाइडलाइनों का संकलित रूप हैं।
इन 11 प्रकार की वित्तीय संस्थाओं पर लागू होंगे नए नियम
नए दिशानिर्देश कुल 11 प्रकार की वित्तीय संस्थाओं पर लागू होंगे। डिजिटल बैंकिंग वाले 7 मास्टर डायरेक्शन जिन संस्थानों पर लागू होंगे, उनमें शामिल हैं:
- कमर्शियल बैंक
- स्मॉल फाइनेंस बैंक
- पेमेंट बैंक
- लोकल एरिया बैंक
- क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक
- अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक
- रूरल को-ऑपरेटिव बैंक
RBI ने डिजिटल बैंकिंग के लिए ठोस नीतियां बनाना किया अनिवार्य
RBI के अनुसार, सभी बैंकों को अब डिजिटल बैंकिंग गतिविधियों के लिए स्पष्ट और मजबूत नीतियां तैयार करनी होंगी। इन नीतियों में निम्न बिंदुओं का विशेष रूप से ध्यान रखने को कहा गया है:
- सभी कानूनी नियमों का पालन
- डिजिटल सिस्टम्स से उत्पन्न जोखिमों का आकलन
- लिक्विडिटी और फंड की उपलब्धता सुनिश्चित करना
- डिजिटल लेनदेन में साइबर सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को प्राथमिकता देना
RBI ने डिजिटल बैंकिंग को ऐसे किसी भी बैंकिंग सेवा के रूप में परिभाषित किया है, जो इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल एप, डिजिटल कियोस्क या किसी स्वचालित प्रणाली के माध्यम से प्रदान की जाती हो।
RBI ने 5,673 पुराने सर्कुलर्स रद्द किए
RBI ने बताया कि पिछले छह महीनों से चल रही उसकी “नियमों को सरल बनाने की प्रक्रिया” अब लगभग पूरी हो चुकी है। इस दौरान केंद्रीय बैंक ने 5,673 पुराने सर्कुलर्स को रद्द किया है, जिन्हें अब अप्रासंगिक माना गया।
RBI का कहना है कि इसका उद्देश्य इकाइयों पर अनुपालन संबंधी अनावश्यक बोझ को कम करना और निगरानी प्रणाली को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है।






