प्रमुख बातें:
- 50 किमी का पैदल मार्च: जामली के एकलव्य आवासीय विद्यालय से सुबह 7 बजे निकले 200 से ज्यादा बच्चे।
- हाईवे पर भारी जाम: मुंबई-आगरा नेशनल हाईवे (NH-3) पर बैठकर किया प्रदर्शन, पुलिस-प्रशासन के फूले हाथ-पांव।
- कलेक्टर से मिलने की जिद: छात्रों ने दो टूक कहा- ‘एसडीएम या पुलिस नहीं, सीधे कलेक्टर से करेंगे शिकायत।’
- हॉस्टल में प्रताड़ना का आरोप: जातिसूचक शब्द कहने, परिजनों से न मिलने देने और छात्राओं के चरित्र पर उंगली उठाने का लगा गंभीर आरोप।
अंकित कीवे (बड़वानी, द विराट केसरी)। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में नई पीढ़ी यानी जेन-अल्फा (Gen-Alpha) के स्कूली छात्र-छात्राओं का एक अभूतपूर्व और उग्र प्रदर्शन देखने को मिला है। अपनी समस्याओं और प्रताड़ना से तंग आकर जामली स्थित ‘एकलव्य आवासीय विद्यालय’ के करीब 200 बच्चों ने 50 किलोमीटर तक का पैदल मार्च किया और मुंबई-आगरा नेशनल हाईवे (NH-3) पर चक्काजाम कर दिया। उनकी बस एक ही जिद थी कि वे अपनी व्यथा और हॉस्टल की सच्चाई सिर्फ जिले के कलेक्टर को ही सुनाएंगे।
सुबह 7 बजे निकले छात्र, पैदल चलते-चलते कई को आए चक्कर
जानकारी के अनुसार, लगभग 200 की संख्या में ये विद्यार्थी सुबह 7 बजे ही अपने हॉस्टल से निकल पड़े थे। उन्होंने 50 किलोमीटर से ज्यादा का पैदल सफर तय किया। इस भीषण गर्मी और थकान के बीच कई छात्राओं को चक्कर भी आ गए। हालत बिगड़ने पर मौके पर एंबुलेंस बुलाई गई और उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। हाईवे जाम होने की सूचना मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया।
अधिकारी मनाते रहे, छात्रों के साथ पैदल चलने को हुए मजबूर
हाईवे पर लगे भारी जाम को खुलवाने के लिए एसडीएम, एसडीओपी, तहसीलदार, स्कूल के प्राचार्य और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। अधिकारियों ने बच्चों को हाईवे से हटाने और वापस लौटने के लिए खूब मिन्नतें कीं।
मजबूरन प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस को भी बच्चों के साथ-साथ कई किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा। एसडीएम ने उन्हें काफी समझाया, लेकिन छात्र अपनी इस मांग पर अड़े रहे कि वे किसी और से नहीं, बल्कि सीधे कलेक्टर से ही बात करेंगे।
“हमें जातिसूचक शब्द कहे जाते हैं, चरित्र पर उंगली उठाई जाती है”
आखिर क्यों इतना बड़ा कदम उठाने पर मजबूर हुए ये छात्र? विद्यार्थियों ने जो आरोप लगाए हैं, वे हॉस्टल प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। छात्रों का आरोप है कि हॉस्टल में उनके साथ बेहद अमानवीय और अभद्र व्यवहार किया जाता है। उन्हें खुलेआम जातिसूचक शब्द कहे जाते हैं। जब उनके परिजन उनसे मिलने आते हैं, तो उन्हें मिलने नहीं दिया जाता। हद तो तब पार हो गई जब कुछ लोगों द्वारा छात्राओं के चरित्र पर भी उंगलियां उठाई गईं।
शिकायत न करने का बनाया जाता है दबाव
छात्र-छात्राओं का कहना है कि उन्हें छात्रावास में मिलने वाली मूलभूत सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हैं। ऊपर से परिजनों से मिलने और हॉस्टल की दुर्दशा की शिकायत न करने को लेकर प्रबंधन द्वारा लगातार मानसिक दबाव बनाया जाता है। लंबे समय से घुट रहे इन बच्चों का सब्र आखिरकार टूट गया और उन्होंने सड़क पर उतरने का फैसला कर लिया।
लंबे हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद जब जिला मुख्यालय से अपर कलेक्टर मौके पर पहुंचे, तब जाकर बच्चों को समझाया जा सका। अपर कलेक्टर ने छात्रों की सारी समस्याएं ध्यान से सुनीं और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद पुलिस ने यातायात सुचारू करवाया।





