प्रमुख बातें:
- बड़ा खुलासा: 2022 में भौतिक सत्यापन के दौरान कागजी रिकॉर्ड से 8,325 किलो ज्यादा मिला था स्किम्ड मिल्क पाउडर (SMP)।
- गायब हुई फाइल?: नोटिस देकर 7 दिन में मांगा गया था जवाब, लेकिन 4 साल बीतने के बाद भी जांच रिपोर्ट और कार्रवाई का अता-पता नहीं।
- मेहरबानी क्यों?: दागी और सेवानिवृत्त (Retired) अधिकारियों को नियमों को ताक पर रखकर पुनर्नियुक्ति देने पर भी खड़े हो रहे गंभीर सवाल।
- प्रबंधन से जवाब तलब: इतनी बड़ी स्टॉक गड़बड़ी क्या महज एक कागजी चूक थी या फिर किसी बड़े भ्रष्टाचार की आहट?
अंकित कीवे (भोपाल, द विराट केसरी)। मध्यप्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (MPCDF) की कार्यप्रणाली एक बार फिर गहरे सवालों के घेरे में है। करीब 4 साल पुराना एक ऐसा गोपनीय दस्तावेज सामने आया है, जिसने भोपाल सहकारी दुग्ध संघ में एक बड़े ‘स्टॉक घोटाले’ की आशंका को जन्म दे दिया है।
साल 2022 में हुए एक औचक भौतिक सत्यापन के दौरान कार्यालय के रिकॉर्ड से 8,325 किलोग्राम स्किम्ड मिल्क पाउडर (SMP) ज्यादा पाया गया था। उस समय इसे “अत्यंत संदिग्ध” मानकर नोटिस तो थमा दिया गया, लेकिन आज चार साल बाद भी उस जांच और कार्रवाई की फाइल कहां धूल खा रही है, इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है।
क्या है 15 अगस्त 2022 का वह संदिग्ध मामला?
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, 15 अगस्त 2022 को एपीसीडीएफ स्तर पर गठित एक समिति ने भोपाल सहकारी दुग्ध संघ में SMP और घी के स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया था। जब इस स्टॉक का मिलान कागजी अभिलेखों (Records) से किया गया, तो समिति के भी होश उड़ गए।
गोदाम में रिकॉर्ड के मुकाबले 8,325 किलो SMP अतिरिक्त पाया गया। इसके बाद 18 अगस्त 2022 को तत्कालीन प्रबंध संचालक ने कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित अधिकारी को एक कारण बताओ नोटिस जारी किया था। पत्र में साफ लिखा गया था कि इस तरह की विसंगति से दुग्ध संघ की छवि धूमिल होती है और उपभोक्ताओं का भरोसा टूटता है।
7 दिन का ‘अल्टीमेटम’, फिर 4 साल का ‘सन्नाटा’!
उस नोटिस में संबंधित अधिकारी को सख्त हिदायत दी गई थी कि वह 7 दिन के अंदर अपना स्पष्टीकरण दें, अन्यथा एकतरफा अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसे ‘सेवा नियमों के तहत दुराचरण’ की श्रेणी में रखा गया था। लेकिन अब 2026 में सबसे बड़ा सवाल यही है कि उस अल्टीमेटम का अंत क्या हुआ? क्या अधिकारी ने कोई संतोषजनक जवाब दिया? संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय हुई या नहीं? या फिर पर्दे के पीछे कोई बड़ा खेल हो गया और मामले को रफा-दफा कर दिया गया?
हजारों किलो का अंतर कोई ‘कागजी चूक’ नहीं हो सकती
डेयरी जैसे विशाल उपक्रम में दूध की खरीद, उत्पादन और वित्तीय लेखा-जोखा सीधे एक-दूसरे से जुड़ा होता है। भौतिक सत्यापन में हजारों किलो सामग्री का अतिरिक्त मिलना कोई साधारण लिपिकीय त्रुटि (Clerical Error) नहीं हो सकती। यदि रिकॉर्ड में माल कम और गोदाम में ज्यादा है, तो यह सीधे तौर पर स्टॉक मैनेजमेंट की नाकामी या किसी बड़े आर्थिक घपले की ओर इशारा करता है।
रिटायरमेंट के बाद भी बांटी जा रही रेवड़ियां?
8,325 किलो SMP के इस मामले ने डेयरी प्रबंधन की एक और बड़ी खामी को उजागर कर दिया है। दुग्ध संघ में लंबे समय से जमे और सेवानिवृत्त (Retired) हो चुके कई अधिकारियों को किस नियम और किस सक्षम अधिकारी की अनुमति से दोबारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं? यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के विरुद्ध पूर्व में ऐसी विभागीय जांच या अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित हुई थी, तो उसका अंतिम परिणाम सार्वजनिक किए बिना उन्हें मलाईदार पदों पर क्यों रखा गया है?
‘द विराट केसरी’ के डेयरी प्रबंधन से 5 सीधे सवाल:
- 8,325 किलो अतिरिक्त SMP पाए जाने का वास्तविक कारण क्या था और स्टॉक रजिस्टर में इसका समायोजन कैसे किया गया?
- 18 अगस्त 2022 के नोटिस का क्या जवाब आया और उस पर क्या अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई?
- क्या इस मामले में किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय हुई या जांच की फाइल बंद कर दी गई?
- यदि कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो ऐसे दागी अधिकारियों को बचाने के पीछे किसका हाथ है?
- सेवानिवृत्ति के बाद भी महत्वपूर्ण पदों पर बैठे कर्मचारियों की पुनर्नियुक्ति का आधार क्या है?
दुग्ध संघ किसानों और आम उपभोक्ताओं से सीधे जुड़ी संस्था है, इसलिए इसकी खरीद-बिक्री और भंडारण में 100% पारदर्शिता होनी चाहिए। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या डेयरी प्रबंधन इस 4 साल पुरानी फाइल का सच जनता के सामने लाएगा या भ्रष्टाचार के इस जिन्न को वापस बोतल में बंद कर देगा।





