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साइबर फ्रॉड रोकने DoT का बड़ा आदेश: अब हर नए फोन में संचार साथी ऐप प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य, विपक्ष ने उठाया निजता का सवाल

न्यूज़ डेस्क: दूरसंचार विभाग (DoT) ने मोबाइल हैंडसेट बनाने वाली सभी कंपनियों को निर्देश दिया है कि भारत में बेचे जाने वाले हर नए डिवाइस में ‘संचार साथी’ ऐप को प्री-इंस्टॉल करना अनिवार्य होगा।

विभाग का कहना है कि यह कदम साइबर फ्रॉड रोकने, दूरसंचार सुरक्षा मजबूत करने तथा डुप्लीकेट/स्पूफ्ड IMEI वाले उपकरणों पर लगाम लगाने के लिए उठाया गया है।

पहली बार सेटअप में ही दिखना जरूरी होगा संचार साथी ऐप

  1. ऐप पहली बार फोन सेटअप के दौरान उपयोगकर्ता को दिखाई देना चाहिए।
  2. ऐप पहली बार फोन सेटअप के दौरान उपयोगकर्ता को दिखाई देना चाहिए।
  3. इसे किसी भी स्थिति में डिसेबल, हाइड या हटाया नहीं जा सकेगा।
  4. यह पूर्ण रूप से कार्यशील और यूज़र के लिए उपलब्ध रहना चाहिए।

निर्माताओं के पास निर्देश मानने के लिए 90 दिन, और कम्प्लायंस रिपोर्ट भेजने के लिए 120 दिन का समय दिया गया है। जो डिवाइस पहले से बाजार में उपलब्ध हैं, उनमें यह ऐप सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए जोड़ा जाएगा।

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संचार साथी क्या है? और 5 बड़े कार्य क्या हैं?

संचार साथी एक नागरिक-केंद्रित ऐप और पोर्टल है, जिसे टेलीकॉम साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए विकसित किया गया है। इसके माध्यम से उपयोगकर्ता–

  • मोबाइल का IMEI नंबर सत्यापित कर सकते हैं।
  • फर्जी, संदिग्ध या फ्रॉड कॉल/मैसेज की शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
  • खोए या चोरी हुए फोन की ऑनलाइन रिपोर्टिंग कर सकते हैं।
  • अपने नाम पर कितने मोबाइल कनेक्शन जारी हैं, इसकी डिटेल देख सकते हैं।
  • बैंकों और वित्तीय संस्थानों की ऑफिशियल कॉन्टैक्ट जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

सरकार का कहना है कि यह ऐप डुप्लीकेट IMEI की समस्या को नियंत्रित करने और अपराधों में उपयोग होने वाले फर्जी फोन की पहचान करने में बेहद सहायक होगा।

कानूनी चेतावनी: सेकंड-हैंड फोन मार्केट में धोखाधड़ी और सजा

देश का सेकंड-हैंड मोबाइल बाजार बहुत बड़ा है। DoT के मुताबिक, चोरी हुए या ब्लैकलिस्टेड फोन दोबारा बेचे जाने के कई मामले सामने आए हैं। ऐसे में संचार साथी के जरिए खरीदार खरीदने से पहले यह जांच सकते हैं कि फोन-

  1. ब्लॉक तो नहीं।
  2. ब्लैकलिस्टेड तो नहीं।
  3. IMEI में छेड़छाड़ तो नहीं।

टेलीकम्युनिकेशन एक्ट-2023 के मुताबिक IMEI से छेड़छाड़ गैर-जमानती अपराध है और इसके लिए–

  • 3 साल तक की जेल।
  • 50 लाख रुपये तक जुर्माना,
  • या दोनों हो सकते हैं।

यह नियम Apple, Samsung, Google, Xiaomi, Vivo, Oppo सहित सभी प्रमुख कंपनियों पर लागू होगा।

बिग ब्रदर निगरानी: विपक्ष ने निजता के उल्लंघन का आरोप लगाया

कार्ति चिदंबरम का बयान

कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम ने इस आदेश को Pegasus++ बताया है और आरोप लगाया कि सरकार इससे नागरिकों की निगरानी करेगी।

के सी वेणुगोपाल का बयान

  • यह आदेश गोपनीयता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
  • अनइंस्टॉल न होने वाला सरकारी ऐप बिग ब्रदर निगरानी जैसा है।
  • सरकार हर भारतीय की गतिविधियों पर नजर रखना चाहती है।

उन्होंने इसे असंवैधानिक बताते हुए आदेश वापस लेने की मांग की है।

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सरकार का जवाब

  • स्पूफ्ड और डुप्लीकेट IMEI राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं।
  • कई बार एक IMEI कई फोन में एक साथ चलता पाया गया।
  • इससे अपराधियों का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
  • ऐप केवल सुरक्षा, सत्यापन और फ्रॉड रोकने के लिए है।
  • इसका उपयोग पूरी तरह नागरिकों के हित में है।

कब से लागू होगा आदेश?

  • आदेश 28 नवंबर 2025 को जारी हुआ।
  • लागू होने के लिए 90 दिन का समय।
  • कम्प्लायंस रिपोर्ट 120 दिन में।

ऐप पहले से ही Google Play Store और Apple App Store पर उपलब्ध है।

नेहा जैन
नेहा जैन
हमारी राष्ट्रीय संपादक, जो भारत सरकार की नीतिगत घोषणाओं और महिला व सामाजिक सुरक्षा मामलों पर गहन संपादकीय निरीक्षण रखती हैं। इनका 15 वर्षों का अनुभव राष्ट्रीय मीडिया में रहा है। इनका मुख्य उद्देश्य सटीकता, तथ्यात्मकता और निष्पक्षता के उच्चतम मानकों के साथ हर खबर को पाठकों तक पहुँचाना है।
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