Rajpal Yadav Case: फिल्म अभिनेता राजपाल यादव ने ₹9 करोड़ के चेक बाउंस से जुड़े मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद तिहाड़ जेल में सरेंडर किया है। यह कार्रवाई अदालत के निर्देश के अनुसार की गई। मामले से जुड़ी जानकारी अदालत के आदेशों और समाचार एजेंसी रिपोर्टों पर आधारित है।
सरेंडर से पहले अभिनेता Rajpal Yadav द्वारा भावनात्मक अपील जारी किए जाने के बाद कुछ सार्वजनिक व्यक्तियों और संगठनों ने आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
संकट के साथी: सोनू सूद से लेकर तेज प्रताप तक, राजपाल की रिहाई के लिए कौन कितना दे रहा?
मामले के सामने आने के बाद विभिन्न व्यक्तियों और संगठनों द्वारा वित्तीय मदद की सार्वजनिक घोषणा की गई है। घोषित सहायता इस प्रकार बताई गई है:
- राव इंदरजीत सिंह ने जेम ट्यून्स परिवार की ओर से ₹1.11 करोड़ की कानूनी सहायता देने की घोषणा की
- जनशक्ति जनता दल (JJD) के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने ₹11 लाख की मदद का ऐलान किया
- फिल्म समीक्षक केआरके (कमाल आर खान) ने ₹10 लाख देने की बात कही
- अभिनेता गुरमीत चौधरी और सोनू सूद ने भी सहयोग का आश्वासन दिया है, हालांकि राशि सार्वजनिक नहीं की गई
सार्वजनिक बयानों के आधार पर अब तक लगभग ₹1.32 करोड़ की घोषित सहायता सामने आई है। यह आंकड़ा घोषणाओं पर आधारित है, वास्तविक जमा राशि अलग हो सकती है।
बकाया राशि को लेकर अदालत में क्या स्थिति बताई गई?
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, अदालत में प्रस्तुत जानकारी में कहा गया कि अक्टूबर 2025 में रजिस्ट्रार जनरल के पास ₹75–75 लाख के दो डिमांड ड्राफ्ट जमा किए गए थे। इसके अतिरिक्त लगभग ₹9 करोड़ की राशि बकाया बताई गई।
रिहाई को लेकर क्या कहा गया?
राव इंदरजीत सिंह द्वारा सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में कहा गया कि उन्होंने अभिनेता के परिवार से बातचीत की है। उनके अनुसार, यदि निर्धारित समयसीमा तक जरूरी रकम जमा नहीं होती है तो वे शेष राशि जमा कराने में सहयोग करेंगे। हालांकि रिहाई का अंतिम निर्णय अदालत और कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर रहेगा।
2010 से 2026 तक: ₹5 करोड़ का कर्ज कैसे बना ₹9 करोड़ का बोझ?
उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड और रिपोर्टों के अनुसार-
- वर्ष 2010 में राजपाल यादव (Rajpal Yadav) ने अपनी निर्देशित फिल्म “अता पता लापता” के निर्माण के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से लगभग ₹5 करोड़ का ऋण लिया था
- फिल्म व्यावसायिक रूप से सफल नहीं रही, जिसके बाद भुगतान विवाद उत्पन्न हुआ
- संबंधित चेक अनादर (बाउंस) मामलों में नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत कानूनी कार्यवाही शुरू हुई
कोर्ट की कार्रवाई: क्यों नहीं मिली राहत? जानें कानूनी प्रक्रिया के अहम पड़ाव
2018
मजिस्ट्रेट अदालत ने चेक बाउंस मामलों में राजपाल यादव और उनकी पत्नी को दोषी ठहराते हुए छह महीने की सजा सुनाई।
2019
सेशन कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई।
2024
दिल्ली हाई कोर्ट ने सजा पर अस्थायी रोक (सस्पेंशन) दी और इसे समय-समय पर बढ़ाया जाता रहा।
दिसंबर 2025
बचाव पक्ष की ओर से अदालत को बताया गया कि आंशिक भुगतान के लिए डिमांड ड्राफ्ट तैयार हैं और शेष राशि निर्धारित तिथि तक जमा करने का आश्वासन दिया गया।
4 फरवरी 2026
दिल्ली हाई कोर्ट ने सरेंडर से राहत बढ़ाने से इनकार करते हुए निर्धारित समय तक जेल प्रशासन के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश दिया।
5 फरवरी 2026
अदालत ने अपने पूर्व आदेश में बदलाव से भी इनकार किया और सरेंडर निर्देश को बरकरार रखा।
यह पूरा प्रकरण न्यायालयीन रिकॉर्ड, सार्वजनिक बयानों और एजेंसी रिपोर्टों पर आधारित है। आगे की कार्रवाई अदालत के आदेशों और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार होगी।






