शिक्षा और करियर विशेषज्ञ: NEET PG प्रवेश प्रक्रिया के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) से परीक्षा देने वाले कई उम्मीदवारों के द्वारा प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों की हाई-फीस वाली सीटें लेने का मामला सामने आया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस वर्ष लगभग 140 EWS कैंडिडेट्स ने मैनेजमेंट या NRI कोटा के तहत ऐसे कॉलेजों में दाखिला लिया है, जिनकी सालाना ट्यूशन फीस 25 लाख से लेकर 1 करोड़ रुपये तक है।
EWS कैंडिडेट ने ली 1 करोड़ रुपये तक की NRI सीट
रिपोर्ट के अनुसार, एक EWS उम्मीदवार जिसकी NEET PG रैंक 1.1 लाख से कम थी, ने बेलगावी स्थित एक कॉलेज में डर्मेटोलॉजी की NRI सीट ली, जिसकी एक वर्ष की फीस 1 करोड़ रुपये से अधिक है। इसी तरह कई उम्मीदवार कम रैंक या मनचाहा कॉलेज न मिलने के कारण NRI/मैनेजमेंट कोटे की सीटों पर चले गए।
EWS और NRI कोटा: पात्रता नियम
EWS आरक्षण वर्ष 2019 में संविधान के 103वें संशोधन के माध्यम से लागू किया गया था। इसके तहत जनरल कैटेगरी के आर्थिक रूप से कमजोर अभ्यर्थियों को शिक्षा और नौकरियों में 10% आरक्षण दिया जाता है।
EWS के लिए आय सीमा 8 लाख रुपये वार्षिक तय है और इसके लिए पिछली एक वर्ष की पारिवारिक आय को आधार बनाया जाता है।
NRI कोटा के लिए आवश्यक शर्तें
NEET में कम स्कोर के बावजूद उम्मीदवार NRI कोटा से सीट ले सकते हैं, यदि वे काउंसलिंग में यह विकल्प चुनते हैं। इसके लिए-
- कैंडिडेट स्वयं NRI हो, या
- NRI अभिभावक/माता-पिता/रिश्तेदार का प्रमाण हो, या
- NRI पर आश्रित होने का वैध दस्तावेज उपलब्ध हो
कई उम्मीदवार अपने विदेश में रहने वाले रिश्तेदारों को कानूनी गार्जियन बनाकर भी सीट लेते हैं।
ED जांच में पकड़ी गई थी फर्जी NRI दस्तावेज़ों की अनियमितताएँ
अगस्त 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावासों की सहायता से प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में फर्जी NRI दस्तावेज़ों से एडमिशन दिलाने वाले नेटवर्क का खुलासा किया था।
जांच के दौरान बताया गया कि पश्चिम बंगाल और ओडिशा में MBBS और PG की लगभग 18,000 सीटों पर अनियमितताएँ पाई गईं। इनमें फर्जी NRI प्रमाणपत्र, नोटरी स्टैंप और परिवर्तित फैमिली ट्री शामिल थे।
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विशेषज्ञ राय: आरक्षण के मूल उद्देश्य पर सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि NRI कोटे की हाई-फीस सीटें कई बार EWS श्रेणी के मूल उद्देश्य और वास्तविक आर्थिक मानदंडों पर प्रश्न उठाती हैं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि EWS नियमों में इनकम कैलकुलेशन एक वर्ष पर आधारित होने से कुछ मामलों में दुरुपयोग की आशंका जताई जाती है।






