न्यूज़ डेस्क: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 4 दिसंबर को दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत आ रहे हैं। लेकिन पुतिन के दिल्ली आने से पहले ही रूस की संसद (डूमा) ने भारत के साथ एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौते को मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी भारत–रूस रक्षा सहयोग को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।
RELOS समझौता: इन 4 सुविधाओं को मिली हरी झंडी
रूसी संसद द्वारा मंजूर यह समझौता, Reciprocal Exchange of Logistic Support (RELOS), दोनों देशों को निम्न सुविधाएँ देगा:
- सैन्य अभ्यास के दौरान सैनिकों और उपकरणों की तैनाती।
- मानवीय सहायता।
- प्राकृतिक आपदा राहत।
- एक-दूसरे के सैन्य ठिकानों का उपयोग।
यह समझौता 18 फरवरी 2025 को हस्ताक्षरित हुआ था। पिछले हफ्ते रूस के प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्तिन ने इसे निचले सदन में पेश किया था, जिसे अब मंजूरी मिल चुकी है।
तीनों सेनाओं का साझा युद्धाभ्यास ‘इंद्रा’ दुनिया में अनोखा
भारत और रूस ऐसे दो देश हैं, जिनकी सेना के तीनों अंग- थलसेना, वायुसेना और नौसेना- संयुक्त सैन्य अभ्यास करते हैं। इस त्रि-सेनात्मक युद्धाभ्यास का नाम है “इंद्रा”।
रूसी संसद के अध्यक्ष: “संबंध रणनीतिक और बेहद मजबूत”
डूमा के अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन ने समझौते की मंजूरी को “द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम” बताया। डूमा अध्यक्ष व्याचेस्लाव वोलोडिन ने बताया कि रूस और भारत के संबंध रणनीतिक और व्यापक रूप से मजबूत हैं।
पुतिन का एजेंडा: व्यापार, निर्यात-आयात पर व्यापक चर्चा
राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि वे-
- 23वें भारत–रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे।
- व्यापार, निर्यात–आयात और रणनीतिक संबंधों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
पुतिन ने साफ कहा कि रूस अपने स्वतंत्र आर्थिक हितों के साथ आगे बढ़ता रहेगा और भारत के साथ साझेदारी मजबूत करने को प्राथमिकता देगा।
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